Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अपुनःस्मरणं सम्यक् चिरविस्मृतकर्म तत् ।
स्थितं स्तम्भोदरसमं स कर्मत्याग उच्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
दीर्घकाल से
भूले गये कर्मो के सदुश विषयों का भलीभाँति पुनः-पुनः स्मरण न होना ही कर्मत्याग कहा जाता
है । वह विस्मरण निरन्तर खम्भे के पेट के सदुश ठोस ओर एकरूप का होना चाहिए