Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
कर्मणो वेदनं त्यागः स च सिद्धः प्रबोधतः ।
अवस्तु नेतरेणार्थः किं कृतेनाकृतेन वा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह पूर्वोक्त विज्ञान ही सम्पूर्णं कर्मो का परित्याग है और यह त्याग आत्मबोध से
स्वतः सिद्ध हो जाता है । इतर देहादि के स्पन्दनरूप कर्म के करने से या न करने से प्रयोजन ही
क्या ?