Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 75
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 75 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
केवलो व्यवहारस्थः काष्ठमौनगतोऽथ वा ।
काष्ठपाषाणवत्तिष्ठन्ब्रह्मतामधिगच्छति ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, समस्त द्वैत से शून्य तत्त्ववेत्ता पुरुष चाहे व्यवहार में
रहे या काष्ठपाषाण के सदृश निश्चल होकर समाधि में स्थित रहते हुए, चाहे लकड़ी के सदृश मौन
धारण करे | सभी स्थिति में वह ब्रह्मरूपता प्राप्त करता ही है