Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
नीलत्वं च यथा व्योम्नि तथा पृथ्व्यादिता शिवे ।
भ्रान्तिमात्रादृते नान्यद्यथा व्योम तथा शिवः ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त दृश्य क्यो विलीन हो जाता हैं डल प्रश्न पर वे श्रान्तिरृप है, यह उत्तर देते हैं /
जैसे आकाश में नीलरूप विलीन हो जाता है । वैसे ही पृथिवी आदि रूप समस्त दृश्य आत्मा
में विलीन हो जाता है । जैसे आकाश में नीलरूप केवल भ्रान्ति छोडकर दूसरा कुछ नहीं है उसी
तरह आत्मा मे पृथिवी आदिरूप भ्रान्ति छोडकर ओर कुछ नहीं है, इसलिए नीलरूप जैसे आकाश
है वैसे ही पृथिवी आदिरूप के प्रति आत्मा है