Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
चेत्योन्मुखत्वमेवाहुश्चेतनस्यास्य चेतनम् ।
एष एव च संसारो बन्धः क्लेशाय भूयसे ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका दूसरे से प्रकाश होना ही संसार है, यह कहते हैं /
इस चेतन का यानी निर्वाणरूप स्वप्रकाशपद का विषयों की ओर झुक जाना ही परप्रकाश
(विषयसम्बन्धरूप क्रिया) कहा गया है और यही संसार है, यह भयानक महान् कष्ट को देनेवाला
बन्धन है