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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

समागमेषु कान्तानामुत्सवेषूदयेषु च । आनन्दं भज सौम्यात्मा वासनाक्रान्तमूढवत् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

सशय से जिस अर्थ को कहा, उसी को विस्तारपूर्वक कहते हैं / कमनीय (रमणीय) विषयों की प्राप्ति के अवसरों में, उत्सवों में एवं उदयकाल में आप सौम्य (शान्त) मूर्ति होकर ऐसे आनन्द मनाइए, जैसे कि भोगवासनाओं से आक्रान्त कर्मठ मूढ पुरुष