Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
वाचि ये ये प्रवर्तन्ते ताननादृत्य दोषकान् ।
प्रतियोगिव्यवच्छेदिपूर्वकान्वद को भवान् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्री रामजी ने कहा : भगवन्, वाणी में जो-जो भिन्नता, विरोधिता आदि से होनेवाले दोष
प्रवृत्त होते हैं, उनका अनादरकर यानी उनमें तात्पर्य न रखकर भागत्यागलक्षणा द्वारा मुझसे कहिए
कि आप कौन हैं ?