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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

पौरुषेण प्रयत्नेन यथा जानासि वा तथा । निवारयाहंभावांशमेषोऽसौ वासनाक्षयः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त कासनाओ का विद्प्रन्थिरूप अहंकार ही मूल है, अत: उसी का आय विनाश कीजिए, यह कहते हैं / श्रीरामभद्र, पुरुष प्रयत्न से आप जिस तरह की युक्ति जानते हों, उस तरह की दृढ़ अभ्रान्त युक्ति से अहंकाररूपी अंश का त्याग कर दीजिए, क्योकि यह अहंकारांश का त्याग ही वासना का क्षय है