Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अथवा वासनोत्साद एवासङ्ग इति स्मृतः ।
यया कयाचिद्युक्त्यान्तः संपादय तमेव हि ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि वासना ही चग है और वासना का उच्छेद ही असगर है, यह मानें; तो तत्वज्ञान के अभ्यास
से ही वासना को जला दीजिए, यह कहते हैं /
भद्र, अथवा वासना का उच्छेद ही असंग है, यह भी पण्डितों का मत है, इसलिए आप उसी
का (वासनोच्छेदरूप असंग का ही) जिस किसी युक्ति से भीतर सम्पादन कीजिए