Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
पूर्वापरमनालोच्य यत्किंचिदभिवाञ्छतः ।
निर्मर्यादस्य मूढस्य बालस्य च किमन्तरम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
अविवेकी की निन्दा करते हैं /
अज्ञानी (मूर्ख) और बालक में क्या अन्तर है ? अर्थात् कुछ भी नहीं, क्योंकि जो अज्ञानी
है, वह पूर्वापरका (आगे-पीछे का) कुछ भी विचार किये बिना जिस किसी की भी इच्छा करने
लगता है, उसकी कोई मर्यादा ही नहीं है