Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
उपशान्तसमस्तेहं विगताखिलकौतुकम् ।
निरस्तवेदनं ज्ञेन विदा केवलमास्यते ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
अब उयसहार करते हैं /
ज्ञानी पुरुष केवल अपने स्वरूप में ही स्थिति रखता है, इस स्थिति में उसकी सारी इच्छाएँ
विलीन हुई रहती हैं, सारी उत्कण्ठाएँ चली गयी रहती है और शरीर का भान भी नहीं रहता