Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
हेम्नः कटकशब्दार्थो व्यतिरिक्तो यथास्ति ते ।
व्यतिरिक्ता तथा सत्या नाहंतास्ति शमात्मनः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सुवर्णनिर्मित कटकशब्दार्थ यानी कड़ा तुम्हे सुवर्णं से पृथक्
भासता है, पर वह सत्य नहीं है, वैसे ही आत्मा से जनित अहन्ता शान्तात्मा परमात्मा से पृथक्
भले ही भासे, पर वह सत्य नहीं है