Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
किं केन कथमेकान्तशान्ताततशिवात्मनि ।
निरालोकोऽपरालोकः शून्ये जगति जन्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उसमे दूसरे किसी अन्य प्रकाश की प्रसक्ति भी नहीं है, यह कहते हैं /
जब यह जगत् अत्यन्त शान्त व्यापक प्रकाशरूप शिवस्वरूप शून्य हो गया, तब उसमें दूसरा
प्रकाश ही कौन ? वह किस क्रिया या साधन से कैसे उत्पन्न किया जा सकता है ?