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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

साप्यदृष्टिरिवान्ध्याय वासनावेशकारिणी । तदेवमतिसंमोहे यत्कार्यमिह दारुणे । उदर्कश्रेयसे तात तन्मे कथय पृच्छते ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए इस तरह चारों ओर से अनर्थो के कारण भयंकर भारी मोह में फँसे मेरे लिए संसारसागर से उद्धार पाने में कल्याणकारक जो कर्तव्य हो, सो कृपाकर कहिये, मैं आपसे विनयपूर्वक पूछ रहा हूँ