Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
वैराग्यविभवोदारा मतिरुक्तिरपीदृशी ।
आकृतिः शान्तरूपा च न भवत्यमहात्मनः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
मैं मनीकियों के रास्ते पर आ ग्या हूँ. इसमे क्ौन-ग्रा मेरा परिचायक चिह्न है 2 इस फर
कहते हैं।
ज्ञानाधिकार प्राप्ति के भाग्य से हीन मनुष्य की वैराग्यविभव से उदार ऐसी मति, उक्ति तथा
शान्तस्वरूप आकृति नहीं हो सकती