Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
एवमुक्तेन तेनाहमिदमुक्तस्ततोऽनघ ।
मद्वाक्येन समाश्वास्य स्नातेनेवामृताम्भसा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ श्रीरामजी, इस तरह मेरे कहने के बाद मेरा आशय जानकर “ये मेरा अवश्य उद्धार
करेंगे” इसलिए मेरे वाक्य से भलीभाँति आश्वासन पाकर अमृतरूपी जल से स्नान किये हुए के
सदृश उस मंकि ने मुझसे यह कहा