Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अपुनर्जन्मने यः स्याद्बोधः स ज्ञानशब्दभाक् ।
वसनाशनदा शेषा व्यवस्था शिल्पजीविका ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
पुनर्जन्म का कारण जो अनादि अज्ञान है उस्रका निवर्तक तत्वज्ञान है, दूसरा नहीं; यह
कहते हैं।
जो बोध पुनर्जन्म का हेतु नहीं है वही ज्ञानशब्द के लिए योग्य है, इसको छोड़कर दूसरा
जो शब्दज्ञान का चातुर्य है वह केवल अन्न-वस्त्र प्रदान करनेवाला है, इसलिए इस तरह का
ज्ञान शिल्पज्ञान के सदुश 'जीविका' शब्द के लिए योग्य है, न कि ज्ञान शब्द के लिए