Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
विराड् हृदि यथा चन्द्रः प्रतिदेहं यथा स्थितः ।
जीवो हिमकणाकारः स्थूले स्थूलो लघौ लघुः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रासंगिक बातें समाप्तकर अब प्रस्तुत का अनुसन्धान कर रहे हैं /
जैसे ब्रह्माण्ड के हदय में विराट्जीव चन्द्रमा स्थित है, वैसे ही प्रत्येक व्यष्टिदेह में हिमकण के
सदृश वीर्यरूप जीव स्थूल में स्थूल एवं लघु में लघु रूप से स्थित है