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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 42

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 42

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे महात्मन्‌ इस प्रकार मैंने तुम्हारे महाप्रश्नों का विचार-फल-भूत निर्णयरूप यह समाधान कहा । तुम इस मार्ग के पथिक बनो । इससे शीघ्र ही तुम मन में शान्त, शरीर में नीरोग और इन्द्रियों में निर्यसन होकर और अधिक सर्वश्रेष्ठ होओ