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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 210 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यथेन्दुत्वं स्वसंकल्पात्सर्वध्यातुः पृथक्पृथक् । भात्येवमेव वनितालाभः काल्पनिकः स्वतः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म के संकल्प से कवित (स्फुरित) है ऐसा कहा इसमें क्या वह ब्रह्म है, अथवा जगत्‌ उसके संकल्प से कचित कैसे ? यह प्रश्न होने पर कहते हैं। यह चिद्धातु ब्रह्म कहा जाता है। वही ब्रह्मा आदि समष्टि जीव और अहमादि व्यष्टि जीव कहलाता है। वह जैसे संकल्प करता है समष्टि-व्यष्टि उपाधि में उसका संकल्परूप जगत्‌ भी वैसे ही स्थित है