Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 207, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 207, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 207 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तस्माद्यथा स्वप्नपुरं यथा संकल्पपत्तनम् ।
तथा पश्यति चिद्व्योम मरणानन्तरं जगत् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, मैं घर से बाहर नहीं निकलता हुआ भी कल्पनापर्यन्त सप्तद्रीपों का अधीश्वर होकर घर पर
स्थित होऊँ यह विरुद्ध हे । किसीने वरदान आदि द्वारा जहाँ प्राप्त किया वहाँ घर के भीतर भोग्यवर
की वरता कैसे उपपन्न होती है ?