Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 35
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
सब कुछ दृश्य शान्त, निराधार, निरामय (निर्दोष) ज्ञानमात्र है। यहाँ न
जगत् की सत्ता है अथवा न असत्ता है तथा यहाँ किंचित् भी भेद नहीं है । दृश्य के इस अपलाप में
“नेह नानास्ति किंचन" यह श्रुति प्रमाण है