Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
मृत्वार्थितं प्रयागादौ क्षेत्रे तत्कथमुच्यताम् ।
खे स्यामक्षयपूर्णेन्दुरिति ध्यायिचितैः फलैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदेकस्वभान ब्रह्म में चित्स्वभाव से विरुद्ध पर्वत काठिन्य आदि स्वभाव कैसे सत्य हो सकते हैं,
ऐसा कहते हैं।
यहाँ न कठिन पर्वत हैं, न द्रवरूप जल है, न शून्य यह आकाश है और न सबको कवलित
करनेवाला काल ही है