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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

क्षणात्संपद्यते तत्र संपत्तिः कथमुच्यताम् । विधीनां प्रतिषेधानां निर्निमित्तं विवल्गताम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

तो ब्रह्म कैसे ब्रह्माण्डाकार बना, कितने काल तक ब्रह्माण्डाकार रहेगा ? यह मुझसे कहने की कृपा कीजिए, यों श्रीरामचन्द्रजी पुनः प्रश्न करते हैं। श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ब्रह्मन्‌, चिन्महाकाश यह (ब्रह्माण्ड) कैसे बना, यह कितना विशाल है अथवा कितने काल तक स्थित रहेगा यह मुझसे कहने की कृपा कीजिये