Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, Verses 25–27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, verses 25–27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 202 · श्लोक 25
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
देह में अभिव्यक्त का देहातीत रहने में दृष्टान्त कहते है ।
जैसे वृक्षगत पुष्प में अभिव्यक्त गन्ध आकाश मेँ पहुँचकर पुष्पातीत रहती हे वैसे ही मैं देह में
अभिव्यक्त होकर देहातीत सम (यह इस पुष्प का है अथवा इस देह का है यों विशेषण के योग्य न होने
से साधारण) रूप से स्थित हूँ