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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

एतच्चेतनशब्दार्थभावनावलितं यदि । तत्कर्म बीजतामेति नो चेत्सत्परमं पदम् ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

यह जीवचैतन्य जिस समय अहंकार आदि से युक्त भें ही चेतन कर्ता हूँ” इस तरह की उद्बुद्ध हुई शब्दार्थभावना से समन्वित होता है उसी समय कर्मों की बीजता को प्राप्त होता है, अन्यथा यह अपने सत्‌ परम पदरूप से ही स्थित रहता है