Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पल्लवावयवा हस्तपादपृष्ठादयोऽरुणाः ।
पत्राणि तनुवृत्तानि सुरेखाणि चलानि च ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हाथों ओर पैरों के पिले हिस्से तथा ओष्ठ, कान और जीभ
आदि इसके लाल-लाल कोमल पल्लवरूप अवयव हैं और हाथों एवं पैरो के तलवे कुछ कठोर
होने से कम लालिमा लिये हुए इसके कुछ गोल तथा सुन्दर रेखाओं से युक्त चंचल पत्ते
हैं