Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
मुहूर्तं प्रति कालोग्रमर्कटध्वंसिताकृतेः ।
निद्राहेमन्तजठरलीनस्वप्नदलोद्गतेः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रत्येक क्षण में कालरूपी उग्र बन्दर हर्ष, विषाद, रोग,
जरा आदि विकार की चेष्टाओं के द्वारा इसकी आकृति को नष्ट करता है । निद्रारूपी हेमन्त
ऋतु के जठर में इसके स्वप्नरूपी पत्तों के निर्गम संकुचित हुए रहते हैं