Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verses 27–28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, verses 27–28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 27,28
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
शास्त्रकृत विचाररूप विकल्पो से भ्रान्तिजनित विकल्पो के क्षालन से आत्मनैर्मल्य की प्राप्ति में
भी दृष्टान्त देते हैं।
जैसे जल में एक ढेले से दूसरे ढेले को धो रहे बालक को ढेलो के क्षय से हाथ में परम निर्मलता प्राप्त
होती हे वैसे ही शास्त्रीय विचाररूप अनेक विकल्पों से भ्रान्तिजनित विकल्पों को पुनः पुनः आत्मतत्त्व
के परीक्षण से धो रहे विद्वान् को अपने विचार से परम शुद्धता प्राप्त होती है