Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 68
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
चूँकि काष्ठमोनपर्यवसायी होने सा काष्ठमोनरूप सर्वापहन
वादविवाद में नहीं हो सकता हे, इसलिए सर्वापहव के न करने से निर्विंशेषरूप आत्मा का परिचय न
होने के कारण वादों में आत्मज्ञान का उदय नहीं होता