Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 40
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
ऐसी स्थिति में अपूर्व स्वप्न के समान वद्धमूल आकारो से क्षणिक बोध ही साकार होता है यह
उपपत्तिशून्य है, ऐसा कहते हैं।
बौद्धों की कल्पना से भी अपूर्व स्वप्न के समान बद्धमूल हुए संसारो के रूप से क्षणिक बोध ही
साकार होता हे, यह बुद्धि उपपन्न नहीं होती