Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
उस निर्विकार शान्त पद में हिरण्यगर्भ नामधारी
(८) प्रत्यक्ष आदि प्रमाणो द्वारा दृढ़ तथा अर्थक्रिया में अविसंवादी होने के कारण स्पष्टतः सत्य
होने से सिर पर चढ़ा हुआ भी, यह अर्थ है ।
पहला चेतन द्विपरार्धपरिमित कुछ काल तक विवर्तरूप आतिवाहिक देह धारणकर स्थित-सा होता है
इसलिए वही जगत्की भ्रान्ति का विषय सिद्ध होता है