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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 81

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 81

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, सब कुछ अपूर्व सा भासित होता है ऐसा ही नियम नहीं है, किन्तु कोई अर्थ जिसका पहले अनुभव नहीं हुआ, चित्त में अपूर्व प्रतीत होता हे । कोई तो जिसका पहले अनुभव हो चुका, अपूर्व प्रतीत नहीं होता ओर वह अनुभव जिस आकार से सृष्टि के आदि, अन्त और मध्य में अभ्यास होता है उस आकार से भासता हे । ब्रह्माकारता के अभ्यास के खूब अभ्यस्त होने पर वैसे ही भासेगा, यह भाव है