Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 79
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 79 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 79
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रघुनाथ, जाग्रत् के संस्कार से जाग्रत्प्रसिद्ध अर्थ का ही स्वप्न मेँ यदि भान
होता है तो स्वप्न में गिरा हुआ घर प्रातः काल जागने पर कैसे प्राप्त होता है ? क्योकि स्वप्न ओर
जाग्रत् के पदार्थो के अभिन्न होने पर स्वाप्न पातन जाग्रतूपातनरूप ही ठहरा, यह भाव है