Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 46
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : भगवन्, यदि ऐसी बात है तो जैसे शान्त सागर में तरंग आदि अपना आकार
धारण करता है वैसे ही जीवन्मुक्त पुरुषों की दृष्टि में स्वरूपमात्ररूप चिन्मय ही अहन्तादि रूप जगत्
तथा बोध्य, बोध आदि त्रिपुटी का आकार धारण करता है, यह सिद्ध हुआ