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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 31

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, कारण का अभाव होने से सृष्टिरूप विशिष्ट भ्रम का अस्तित्व ही नहीं है। त्वम्‌, अहम्‌ इत्यादि सब कुछ अद्वितीय निर्विकार शान्त ब्रह्म ही है। भाव यह कि शास्त्रों के अनुशीलन से ज्ञात ब्रह्मतत्त्व की दृष्टि से विश्रम भी अनुपपन्न हो, इससे कृतकृत्य शास्त्र विफल नहीं कहा जा सकता है, यह उत्तर का आशय है