Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
काकतालीयवद्ब्रह्म यद्भातीवात्मनात्मनि ।
स तेनैवात्मनात्मैव जगदित्यवबुध्यते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, शम, दम आदि साधनों से युक्त सम्यक् ज्ञानरूप प्रबोध से भ्रान्ति हट
जाती हे । भ्रान्तिरूप स्वप्न के हट जाने पर इस प्रकार की ज्ञेयताशान्तिरूप मुक्ति भूमिका की पुष्टि के
क्रम से होती हे