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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 29

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, कारण का संभव न होने के कारण सृष्टि के आदि में कुछ उत्पन्न ही नहीं हुआ | ऐसी परिस्थिति मेँ चेत्य का संभव कहाँ से होगा इसलिए सब कुछ शान्त है । सृष्टि तो रज्जु में सर्पत्वभान की तरह सीप में रजतबुद्धि की तरह तथा मरुभूमि में जलभान की तरह भ्रममात्र है