Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अभावादर्थदृष्टीनां चिदेवेत्थं प्रकाशते ।
जगद्भानमिदं यत्तन्न जाग्रन्न सुषुप्तकम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, कारण में जो कार्य है वह उससे उत्पन्न होता है किन्तु कारण में असत्
कार्य कैसे उत्पन्न हो सकता है, घट से पट की उत्पत्ति कदापि नहीं होती है । भाव यह है कि ब्रह्म
चिदेकरस हे उसमें जगत् बीज शक्ति नहीं हे