Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सूक्ष्मः स्थूलोऽम्बरात्मैष व्यक्तोऽव्यक्तोन्तवर्जितः ।
सर्वस्य बहिरन्तश्च न किंचित्किंचिदेव च ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
यही अव्यक्त अनन्त
आकाशात्मा परमेश्वर पिपीलिकादि सूक्ष्म देहों में सूक्ष्म, स्थूल पदार्थों में स्थूल, सबके बाहर और
भीतर व्यक्तअव्यक्त, परमार्थ में किंचिद्रूप न होने पर भी व्यवहार में किंचिद्रूप यानी परिच्छिन्नरूप
है