Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
स्वसंकल्पकृतेनासौ कल्पौघेन क्षणेन च ।
यदृच्छयोदेति पुनः पुनर्भूत्वोपशाम्यति ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अपने
संकल्प से कल्पित अनेक कल्पां में तथा क्षणभर में वह अपनी इच्छा के अनुसार स्वयं उदित होता
है तथा पुनः पुनः उदित हो होकर वह फिर-फिर शान्त भी हो जाता है