Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
स पञ्चावयवः पश्चाद्राजते पुरुषो विराट् ।
अनन्ताकारसंवित्तिरव्यक्तात्मा निरामयः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पीछे आदित्य, दिशा,
जल, वायु ओर पृथिवीरूप पाँच इन्द्रिय -स्थानरूप अवयवो से युक्त होकर रूप आदि पाँच विषयों
का उपभोग कर रहा विराट पुरुष बन जाता है, यह विराट् पुरुष अनेक मानसिक विकल्पों के
कारण अनन्त आकार की कल्पनाओं द्वारा अनन्त आकारो के विज्ञान से युक्त रहता है, इसका
स्वरूप अव्यक्त है तथा समस्त विकारों से शून्य है