Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verses 9–10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 9,10
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकरूपाणामाधिभौतिकता स्वयम् ।
असती सत्यवद्दूरमर्वाग्दर्शिभिरर्थिता ॥ ९ ॥
अयं सोहमिदं तन्म इमा गिरिनभोदिशः ।
इति मिथ्याभ्रमो भाति भास्वरस्वप्नशैलवत् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
निराकार निर्विकार यह चिदाभासरूप जीव आतिवाहिक देह के नाम से विद्वानों द्वारा
उत्पत्ति नाशवान् कहा जाता है । इस प्रकार स्वप्ननगर ओर संकल्पपुर के समान यह त्रिजगद्भरम भोग
ओर मोक्षरूप अर्थ का कर्ता होने पर भी निर्स्वरूप, शून्य ओर अमूर्तरूप (प्रतिघात के अयोग्य) प्रतीत
होता है