Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
द्रष्टाऽसत्यमसत्यं दृगसत्यं दर्शनं ततम् ।
सत्यमेवाथवा सर्वं ब्रह्मैवात्मतया तया ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जीव के ओपाधिक प्रवृत्तिनिमित्त ओर उनके भेदो से जनित विविध नामों को सुनाते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस चिदाभासात्मक जीव के बहुत से नाम हैँ । चेत्य की ओर प्रवण चिदात्मा के
उन विचित्र नामों को आप सुनें