Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आदिसर्गे पदार्थत्वं तत्स्वभावाच्छमेव च ।
चिद्व्योम्ना यद्यथा बुद्धं तत्तथाद्यापि विन्दते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ शाप तीन नेत्रवाले, शूलहाथ में लिये हुए, भयानक, काले
बादल से शरीरवाले, दो हाथों से युक्त और मुँह पर भौंह चढ़ाये हुए होंगे १३॥ वह कहेंगे : हे शापों, आप
लोग दूर भाग जाओ। यह ऋतुओं की तरह हम लोगों का समय उपस्थित है । उसका कौन उल्लंघन कर
सकता है ?