Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verses 29–30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, verses 29–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 29,30
संस्कृत श्लोक
तद्भार्याष्टकमेतेषु यातेषु तपसे चिरम् ।
बभूव दुःखितं स्त्रीणां यद्वियोगोऽहिदुःसहः ॥ २९ ॥
दुःखिताः प्रत्यये तेषां चक्रुस्ता दारुणं तपः ।
शतचान्द्रायणं तासां तुष्टाभूत्तेन पार्वती ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधु लोगों, मेरा आवासभूत
सुन्दरता के कारण इस काननदेवी की चोटी-सा जो यह कदम्बवृक्षरूपी बच्चा आप लोगों को
दिखाई देता है यहाँ किसी विशेष कारण से भगवती पार्वतीजी सरस्वती बनकर सकल ऋतुओं से
सेवित हो दस वर्ष रहीं