Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, Verses 39–40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 181, verses 39–40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 181 · श्लोक 39,40
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्वने चिरमुवास हरार्धदेहा केनापि कारणवशेन चिराय गौरी ।
भूत्वा प्रसन्नशशिबिम्बमुखी कदम्बवागीश्वरी शशिकलेव शिवस्य मूर्ध्नि ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्नान करके पवित्र-हस्त हो अघमर्षण का जप करके तप की सिद्धि के बल से उसी वृक्ष से
प्राप्त फलों से मेरे साथ उसने व्रत की पारणा की । उसी के पुण्यप्रताप से प्राप्त हुए वृक्ष के स्वादयुक्त
फलों से आश्वस्त हुए हम दोनों तीन दिन तक आराम के साथ वहाँ रहे