Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
इत्थं न सज्जगद्भ्रान्तिरसत्यैवोदितेव ते ।
न विनश्यति नोदेति केवलं ब्रह्मरूपिणी ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मृत प्राणियों के प्राण में स्थित जगत् संकल्पमात्र होने से असद्रप है, इसी तरह हे श्रीरामजी,
आपका भी यह जगत् असद्रूप ही है । एकमात्र भ्रान्ति ही उदित हुई-सी है । परमार्थ में तो वह
भ्रान्ति भी न तो नष्ट होती है ओर न उदित ही होती है । अर्थात् तत्त्वदृष्टि से देखने पर तो वह
भ्रान्ति भी एकमात्र ब्रह्मरूपिणी ही है