Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 72
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 72 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 72
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तो चित्त, दृश्य और शरीर इन तीनों का कारण क्या है ? इस प्रश्न पर उसे कहते है ।
चित्त, दृश्य और शरीररूप त्रिक का कारण अज्ञान (ब्रह्मात्मभाव का आवरण करनेवाली अविद्या)
ही है । ओर कुछ ही संस्कृत मतिवाले पुरुषों का उक्त त्रिक पढ़े गये इस शास्त्र से ही शान्त हो जाता
है