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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 31

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जैसे उन्मेष ओर निमेषकाल में एक-सा नेत्रगोलक एक ही है उसी मे निमेष उन्मेष का लय होता है वैसे ही प्रलय और सृष्टि में एक-सा ब्रह्म एक है उसी में उनका लय होता है, ऐसा कहते है । दृश्य ब्रह्म का उन्मेष है ओर दृश्य का अभाव (प्रलय) निमेष है दोनों अवस्थाओं में निराकार यह एक ही हे, क्योकि उन दोनों का ही इरी में लय होता हे